अब इस पूरे मामले पर हाईकोर्ट की सुनवाई बेहद अहम मानी जा रही है। कोर्ट का फैसला यह तय कर सकता है कि पंचायतों का संचालन आगे किस व्यवस्था के तहत होगा। यदि कोर्ट प्रधानों के पक्ष में फैसला देता है तो सरकार को अपने आदेशों में बदलाव करना पड़ सकता है।
उत्तर प्रदेश की लाखों ग्रामीण जनता, पंचायत प्रतिनिधि और राजनीतिक दल इस मामले की अगली सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं। आने वाला फैसला पंचायत चुनाव और स्थानीय प्रशासन की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।