Sitapur-एशिया प्रसिद्ध प्लाईवुड फैक्टरी हुई सील, देखे अंदर क्या क्या था?

सीतापुर: एशिया की प्रसिद्ध प्लाईवुड फैक्ट्री हुई सील, आखिर अंदर क्या मिला? जानिए पूरी कहानी

सीतापुर की वर्षों पुरानी और कभी एशिया की प्रसिद्ध मानी जाने वाली प्लाईवुड फैक्ट्री एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। लंबे समय से बंद पड़ी इस ऐतिहासिक औद्योगिक इकाई पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए फैक्ट्री परिसर को सील कर दिया। कार्रवाई के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस की मौजूदगी में पूरे परिसर का निरीक्षण किया गया, जिसके बाद फैक्ट्री के मुख्य गेट सहित कई हिस्सों को सील कर दिया गया। यह कार्रवाई जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है।

कभी हजारों लोगों को मिलता था रोजगार

सीतापुर की यह प्लाईवुड फैक्ट्री एक समय प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे एशिया में अपनी पहचान रखती थी। यहां बड़ी मात्रा में प्लाईवुड का उत्पादन होता था और हजारों लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता था। लेकिन समय के साथ आर्थिक संकट, कानूनी विवाद और बढ़ते बकाये के कारण फैक्ट्री का संचालन पूरी तरह बंद हो गया। पिछले करीब 25 वर्षों से यह परिसर वीरान पड़ा हुआ था।

प्रशासन ने क्यों की सीलिंग?

प्राप्त जानकारी के अनुसार फैक्ट्री से जुड़े लंबे समय से चल रहे राजस्व और स्वामित्व संबंधी मामलों के बाद प्रशासन ने सरकारी आदेशों के अनुपालन में कार्रवाई की। अधिकारियों की टीम पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और पूरे परिसर का निरीक्षण करने के बाद फैक्ट्री को सील कर दिया। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई सरकारी अभिलेखों और प्रशासनिक आदेशों के आधार पर की गई है।

निरीक्षण के दौरान अंदर क्या मिला?

सीलिंग के दौरान अधिकारियों ने फैक्ट्री के विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण किया। परिसर के अंदर वर्षों से बंद पड़े विशाल उत्पादन हॉल, पुरानी मशीनें, जंग खा चुके उपकरण, गोदाम, कार्यालय भवन और अन्य औद्योगिक संरचनाएं मिलीं। कई स्थानों पर मशीनरी धूल और जंग की परतों से ढकी हुई थी, जिससे साफ दिखाई देता है कि लंबे समय से यहां किसी प्रकार का उत्पादन कार्य नहीं हुआ है। इसके अलावा कई भवन जर्जर अवस्था में पाए गए और परिसर में झाड़ियां भी उग आई थीं।

करोड़ों की संपत्ति पर प्रशासन का कब्जा

बताया जा रहा है कि फैक्ट्री परिसर की जमीन और भवनों का मूल्य करोड़ों रुपये में आंका जाता है। लगभग 71 बीघा क्षेत्र में फैले इस औद्योगिक परिसर पर प्रशासन द्वारा कब्जा लेने और सीलिंग की कार्रवाई के बाद अब आगे की कानूनी एवं प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

स्थानीय लोगों में चर्चा

फैक्ट्री पर हुई कार्रवाई की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए। कई लोगों ने इस फैक्ट्री से जुड़ी अपनी पुरानी यादें साझा कीं। उनका कहना है कि एक समय यह उद्योग सीतापुर की आर्थिक पहचान हुआ करता था और हजारों परिवारों की आजीविका इससे जुड़ी हुई थी। अब प्रशासन की कार्रवाई के बाद लोगों के बीच यह चर्चा भी तेज हो गई है कि भविष्य में इस विशाल परिसर का क्या उपयोग होगा।

आगे क्या होगा?

फिलहाल प्रशासन द्वारा फैक्ट्री परिसर को पूरी तरह सील कर दिया गया है। आगे न्यायालय और संबंधित विभागों के निर्देशों के अनुसार संपत्ति के प्रबंधन, स्वामित्व और संभावित उपयोग को लेकर निर्णय लिया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि पूरी प्रक्रिया कानून के दायरे में रहकर की जा रही है।फिलहाल प्रशासन द्वारा फैक्ट्री परिसर को पूरी तरह सील कर दिया गया है। आगे न्यायालय और संबंधित विभागों के निर्देशों के अनुसार संपत्ति के प्रबंधन, स्वामित्व और संभावित उपयोग को लेकर निर्णय लिया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि पूरी प्रक्रिया कानून के दायरे में रहकर की जा रही है।

निष्कर्ष

सीतापुर की यह ऐतिहासिक प्लाईवुड फैक्ट्री कभी जिले की औद्योगिक पहचान थी, लेकिन वर्षों से बंद रहने के बाद अब प्रशासनिक कार्रवाई के चलते फिर सुर्खियों में है। फैक्ट्री की सीलिंग ने न केवल पुराने औद्योगिक इतिहास को फिर से चर्चा में ला दिया है, बल्कि इसके भविष्य को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में प्रशासन और संबंधित विभागों की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें बनी रहेंगी।

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