बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में तैनात एक दरोगा नरेश बाबू पर एक महिला ने गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का दावा है कि दरोगा ने उससे प्रेम संबंध बनाए, शादी का भरोसा दिया और बाद में धोखा दिया। महिला का यह भी आरोप है कि वह गर्भवती हो गई, लेकिन दरोगा ने जिम्मेदारी निभाने से इनकार कर दिया। इसके अलावा महिला ने धन उगाही, मानसिक उत्पीड़न और धमकी देने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
महिला के अनुसार, उसकी मुलाकात दरोगा नरेश बाबू से कुछ समय पहले हुई थी। बातचीत धीरे-धीरे प्रेम संबंध में बदल गई। महिला का आरोप है कि दरोगा ने उससे शादी करने का वादा किया और इसी भरोसे पर दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं। कुछ समय बाद महिला गर्भवती हो गई। जब उसने दरोगा से शादी और बच्चे की जिम्मेदारी उठाने की बात कही तो उन्होंने दूरी बनानी शुरू कर दी।
पीड़िता का आरोप है कि दरोगा ने न केवल उससे रिश्ता तोड़ लिया, बल्कि उसे लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित भी किया। महिला का कहना है कि जब उसने अपने अधिकारों की बात की तो उसे धमकियां दी गईं और मामला दबाने का प्रयास किया गया। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि दरोगा ने उससे अलग-अलग बहानों से पैसे भी लिए और आर्थिक रूप से उसका शोषण किया।
महिला का कहना है कि उसने न्याय की उम्मीद में संबंधित अधिकारियों से शिकायत की है। शिकायत में उसने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, आरोपी दरोगा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। महिला का कहना है कि यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं हुई तो उसे और उसके परिवार को खतरा हो सकता है।
इस मामले के सामने आने के बाद पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से वायरल हो रहा है, जहां लोग निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल पुलिस प्रशासन की ओर से मामले की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि महिला द्वारा लगाए गए सभी आरोपों की गंभीरता से जांच की जाएगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, अभी तक आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही जांच पूरी हुई है। ऐसे में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। कानून के अनुसार जांच पूरी होने तक सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अधिकार है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि वर्दी में तैनात अधिकारियों से समाज जिस विश्वास और जिम्मेदारी की अपेक्षा करता है, उसे बनाए रखना कितना आवश्यक है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।