सीतापुर/लखनऊ: लखनऊ में एक कोचिंग संस्थान में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक हादसे में कई परिवारों की खुशियां पलभर में उजड़ गईं। इन्हीं परिवारों में सीतापुर के रहने वाले आदित्य का परिवार भी शामिल है, जहां बेटे की खबर ने पूरे घर को गहरे सदमे में डाल दिया।
जब आदित्य की मां से इस दर्दनाक घटना को लेकर बातचीत की गई तो उनका दर्द शब्दों में बयां नहीं हो पा रहा था। नम आंखों के साथ उन्होंने कहा, “आंखों के सामने सब कुछ गया मिट। जिस बेटे के उज्ज्वल भविष्य के सपने देखे थे, आज वही सपने टूट गए।”
परिजनों के अनुसार, आदित्य पढ़ाई के प्रति बेहद गंभीर और मेहनती छात्र था। बेहतर भविष्य बनाने के लिए वह लखनऊ में कोचिंग कर रहा था। परिवार को उम्मीद थी कि एक दिन वह अपने सपनों को पूरा कर परिवार का नाम रोशन करेगा, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
घटना की सूचना मिलते ही परिवार के लोग लखनऊ के लिए रवाना हो गए। अस्पताल और घटनास्थल पर पहुंचने के बाद परिवार की हालत देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। मां बार-बार बेटे को याद कर बेसुध होती रहीं, जबकि अन्य परिजन उन्हें संभालने की कोशिश करते रहे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस हादसे ने केवल एक परिवार ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र को दुखी कर दिया है। आदित्य अपने गांव और मोहल्ले में एक होनहार छात्र के रूप में जाना जाता था। उसकी सादगी, मेहनत और व्यवहार के कारण हर कोई उसे पसंद करता था।
इस दर्दनाक हादसे के बाद कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा मानकों का पालन किया गया होता और पर्याप्त अग्निशमन व्यवस्था मौजूद होती, तो शायद इतनी बड़ी त्रासदी को टाला जा सकता था।
परिवार ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील की है। उनका कहना है कि भविष्य में किसी अन्य परिवार को इस तरह का दुख न झेलना पड़े, इसके लिए सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाना चाहिए।
फिलहाल पूरे सीतापुर में शोक का माहौल है। रिश्तेदार, पड़ोसी और परिचित लगातार परिवार के घर पहुंचकर संवेदनाएं व्यक्त कर रहे हैं। हर किसी की जुबान पर सिर्फ एक ही बात है कि एक होनहार छात्र का असमय चले जाना समाज के लिए अपूरणीय क्षति है।
यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि छात्रों की जिंदगी से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। ऐसे मामलों में प्रशासन, संस्थान संचालकों और संबंधित विभागों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।