Sitapur- खाद के लिए ऐप बना आफत, Mobile-Server के फेर मे फंसा किसान,नई व्यवस्था से बढ़ी मुश्किले !
सीतापुर। खेती-किसानी के लिए समय पर खाद उपलब्ध होना बेहद जरूरी है, लेकिन इन दिनों सीतापुर के कई किसानों को नई डिजिटल व्यवस्था के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खाद वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से मोबाइल ऐप आधारित सिस्टम लागू किया गया है, लेकिन तकनीकी खामियों और सर्वर की समस्याओं ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
खाद खरीदने के लिए किसानों को अब मोबाइल ऐप के माध्यम से पंजीकरण और सत्यापन की प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी, स्मार्टफोन का सीमित उपयोग और बार-बार सर्वर डाउन होने जैसी समस्याओं के कारण कई किसान समय पर खाद नहीं ले पा रहे हैं। नतीजतन, उन्हें घंटों लाइन में इंतजार करना पड़ता है और कई बार बिना खाद लिए ही वापस लौटना पड़ता है।
किसानों का कहना है कि पहले की व्यवस्था अपेक्षाकृत सरल थी, लेकिन नई प्रक्रिया में तकनीकी बाधाएं अधिक हैं। कई बार ऐप खुलता नहीं है, तो कभी ओटीपी आने में देरी होती है। वहीं, सर्वर स्लो होने के कारण बिक्री केंद्रों पर लंबी कतारें लग जाती हैं, जिससे किसानों का समय और श्रम दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
खाद विक्रेताओं की भी अपनी चुनौतियां हैं। उनका कहना है कि यदि सर्वर ठीक से काम नहीं करता, तो वे चाहकर भी किसानों को खाद जारी नहीं कर सकते। कई केंद्रों पर कर्मचारियों को बार-बार सिस्टम रीफ्रेश करना पड़ता है, जिससे पूरी प्रक्रिया धीमी हो जाती है। इसका असर बिक्री की गति पर भी पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल तकनीक का उद्देश्य व्यवस्था को बेहतर बनाना है, लेकिन इसके सफल संचालन के लिए मजबूत तकनीकी ढांचा और ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर इंटरनेट सुविधा आवश्यक है। यदि ऐप और सर्वर सुचारु रूप से काम करें, तो किसानों को पारदर्शी और तेज सेवाएं मिल सकती हैं। लेकिन वर्तमान स्थिति में तकनीकी दिक्कतें किसानों के लिए परेशानी का कारण बन रही हैं।
कृषि कार्य मौसम पर निर्भर करता है और बुवाई या फसल प्रबंधन के दौरान थोड़ी सी देरी भी उत्पादन को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में समय पर खाद न मिलने से किसानों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। कई किसान प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि सर्वर संबंधी समस्याओं का जल्द समाधान किया जाए और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जाए।
प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने चुनौती यह है कि डिजिटल व्यवस्था को किसानों के लिए आसान और भरोसेमंद बनाया जाए। यदि तकनीकी खामियों को दूर कर दिया जाए और ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सहायता उपलब्ध कराई जाए, तो यह प्रणाली भविष्य में किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है। फिलहाल, सीतापुर के अनेक किसान मोबाइल ऐप और सर्वर की उलझनों के बीच समय पर खाद पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।