सरायन नदी का जलस्तर बढ़ा, नदी किनारे इलाकों में बढ़ी सतर्कता

सीतापुर में नदियों का जलस्तर बढ़ा, प्रशासन अलर्ट: सरायन नदी खतरे के निशान से ऊपर, कई इलाकों में बढ़ा बाढ़ का खतरा

सीतापुर। जिले में लगातार हो रही बारिश और बैराजों से छोड़े जा रहे पानी के कारण नदियों के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। सरायन नदी के उफान पर आने से शहर और नदी किनारे बसे इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। वहीं जिले के गांजर क्षेत्र में शारदा नदी का जलस्तर भी खतरे के निशान को पार कर चुका है। बिगड़ते हालात को देखते हुए प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है और प्रभावित क्षेत्रों में अधिकारियों एवं राजस्व टीमों को अलर्ट किया गया है।

सरायन नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर

सीतापुर शहर के बीच से होकर बहने वाली सरायन नदी में भारी बारिश के बाद तेजी से पानी बढ़ा है। 7 सितंबर को नदी का जलस्तर 15 सेंटीमीटर बढ़कर 132.50 मीटर तक पहुंच गया, जबकि खतरे का निशान 131 मीटर निर्धारित है। यानी नदी का पानी खतरे के निशान से करीब 1.50 मीटर ऊपर बह रहा था।नदी का जलस्तर बढ़ने से आसपास के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। इससे पहले भी सरायन नदी के बढ़े जलस्तर के कारण दुर्गापुरवा, आलमनगर, नई बस्ती, तरीनपुर और लोनियनपुरवा जैसे इलाकों में पानी पहुंचने की स्थिति सामने आई थी। कुछ स्थानों पर लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की जरूरत भी पड़ी।

60 से अधिक गांवों में पहुंचा बाढ़ का पानी

सीतापुर के गांजर क्षेत्र में भी बाढ़ की स्थिति गंभीर होती दिखाई दे रही है। रिपोर्ट के अनुसार, गिरिजापुरी के तीनों बैराजों से लगातार लाखों क्यूसेक पानी छोड़े जाने के कारण क्षेत्र में बाढ़ का प्रभाव बढ़ा है। 7 सितंबर को शारदा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 11 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया। वहीं सरयू नदी का जलस्तर 118.80 मीटर रहा, जो खतरे के निशान से 20 सेंटीमीटर नीचे था।बाढ़ के पानी के कारण जिले के 60 से अधिक गांव प्रभावित बताए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में रास्तों, खेतों और निचले इलाकों में पानी भरने से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। किसानों के लिए भी यह स्थिति चिंता का विषय है, क्योंकि खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान का खतरा बढ़ जाता है।

लगातार बारिश और बैराजों से छोड़ा गया पानी बना वजह

सीतापुर में नदियों के बढ़ते जलस्तर के पीछे लगातार बारिश के साथ-साथ बैराजों से छोड़े जा रहे पानी को भी प्रमुख कारण माना जा रहा है। इससे पहले जिले में शारदा और घाघरा नदियों में भी जलस्तर बढ़ने की स्थिति सामने आ चुकी है। 31 अगस्त की रिपोर्ट के मुताबिक बैराजों से करीब 3.66 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद घाघरा और शारदा नदियों में उफान की स्थिति बनी थी।ऐसे में नदी के आसपास रहने वाले लोगों के लिए अगले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं। जलस्तर में थोड़ी सी भी अतिरिक्त बढ़ोतरी निचले इलाकों में स्थिति को और गंभीर बना सकती है।

प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी

नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है। राजस्व टीमों को अलर्ट किया गया है और उप जिलाधिकारी तथा तहसीलदार स्तर के अधिकारी प्रभावित इलाकों का निरीक्षण कर रहे हैं। राहत चौकियों पर आवश्यक व्यवस्थाएं तैयार रखने की बात भी सामने आई है।प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित रखना है। ग्रामीणों से भी नदी के किनारे जाने और तेज बहाव वाले पानी में प्रवेश करने से बचने की अपील की जा रही है।

ग्रामीणों के सामने बढ़ी मुश्किलें

बाढ़ का पानी बढ़ने के साथ ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी चुनौती आवागमन की है। कई गांवों को जोड़ने वाले रास्तों पर पानी और कीचड़ जमा होने से आने-जाने में परेशानी हो रही है। जिन इलाकों में पानी घरों के आसपास तक पहुंच गया है, वहां लोगों को अपने परिवार और मवेशियों की सुरक्षा की चिंता सताने लगी है।किसानों के लिए भी नदी का बढ़ता जलस्तर चिंता का कारण है। खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से फसलों को नुकसान हो सकता है। वहीं नदी के किनारे कटान का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में ग्रामीण लगातार प्रशासन से निगरानी और राहत व्यवस्था मजबूत रखने की मांग कर रहे हैं।

लोगों से सावधानी बरतने की अपील

बढ़ते जलस्तर को देखते हुए नदी किनारे रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। प्रशासन की ओर से जारी होने वाली स्थानीय सूचनाओं पर ध्यान देना चाहिए। बच्चों को नदी, नालों और तेज बहाव वाले पानी के आसपास नहीं जाने देना चाहिए। पानी से घिरे रास्तों को पार करने की कोशिश भी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि सामान्य दिखाई देने वाला पानी भी तेज बहाव और गहराई के कारण खतरनाक हो सकता है।जरूरत पड़ने पर स्थानीय प्रशासन द्वारा बताए गए सुरक्षित स्थान या राहत केंद्र में जाने में देरी नहीं करनी चाहिए। पशुओं को भी सुरक्षित और ऊंचे स्थान पर रखने की व्यवस्था पहले से कर लेना बेहतर होगा।

सीतापुर में फिलहाल सतर्क रहने की जरूरत

सीतापुर में सरायन नदी का खतरे के निशान से ऊपर बहना और गांजर क्षेत्र में शारदा नदी का बढ़ा जलस्तर प्रशासन के लिए गंभीर संकेत है। एक ओर सरायन नदी के कारण शहर के निचले इलाकों में चिंता बढ़ी है, वहीं दूसरी ओर शारदा नदी के आसपास के गांवों में बाढ़ का असर दिखाई दे रहा है।हालांकि जलस्तर में आगे क्या स्थिति बनेगी, यह बारिश और बैराजों से छोड़े जाने वाले पानी पर काफी हद तक निर्भर करेगा। ऐसे में नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को फिलहाल सतर्क रहने की जरूरत है। प्रशासन की निगरानी और समय पर राहत व्यवस्था के साथ लोगों की सावधानी इस स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण होगी।
सीतापुर में बढ़ता नदी जलस्तर अब सिर्फ मौसम की खबर नहीं, बल्कि नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा से जुड़ा अहम मुद्दा बन गया है। आने वाले दिनों में जलस्तर पर सभी की नजर बनी रहेगी।

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