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देश के पड़ोसी देश नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भारी बारिश के बाद अब भारत के कुछ हिस्सों में भी बाढ़ का खतरा बढ़ता दिखाई दे रहा है। लगातार बारिश के कारण नदियों और जलाशयों का जलस्तर बढ़ रहा है, जिसके चलते प्रशासन को कई संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। पश्चिम बंगाल में विशेष रूप से सतर्कता बढ़ाई गई है, जबकि बिहार में भी संभावित बाढ़ को देखते हुए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं।हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे भारत में विनाशकारी बाढ़ आने वाली है। अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय मौसम, नदी का जलस्तर, बांधों से पानी छोड़े जाने और बारिश की तीव्रता के आधार पर खतरा अलग-अलग हो सकता है।
नेपाल में हाल के दिनों में आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। रिपोर्टों के अनुसार, हिमालयी क्षेत्र में आई आपदा के बाद 1,200 से अधिक लोगों की मौत हुई है और हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। लगातार बारिश और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण राहत एवं बचाव कार्य भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।नेपाल की इस आपदा ने भारत के उन राज्यों को लेकर चिंता बढ़ा दी है जो भारी बारिश, नदियों के बढ़ते जलस्तर या जलाशयों से पानी छोड़े जाने के कारण प्रभावित हो सकते हैं।
लगातार भारी बारिश के कारण दामोदर घाटी जलाशय विनियमन समिति (DVRRC) ने पश्चिम बंगाल के सिंचाई विभाग को बाढ़ के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी करने को कहा है। दामोदर नदी से जुड़े जलाशयों में पानी की आवक बढ़ने के कारण जल निकासी भी बढ़ाई गई है।मैथन और पंचेत जलाशयों से पानी छोड़ने की मात्रा बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। लगातार बारिश के कारण सहायक नदियों से भी जलाशयों में तेजी से पानी पहुंच रहा है। ऐसी स्थिति में निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए खतरा बढ़ सकता है।
बढ़ते जलस्तर के कारण पूर्व बर्दवान, हुगली और हावड़ा जैसे निचले इलाकों में बाढ़ की आशंका जताई गई है। दामोदर बैराज से पानी की निकासी भी बढ़ाई गई है। रिपोर्ट के अनुसार बैराज का जलस्तर निर्धारित अधिकतम स्तर के काफी करीब पहुंच गया था।निचले इलाकों में यदि बारिश का सिलसिला जारी रहता है और नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ता है, तो खेतों, गांवों, सड़कों और रिहायशी क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति गंभीर हो सकती है।
पश्चिम बंगाल के अलावा बिहार में भी संभावित बाढ़ को लेकर प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। पड़ोसी क्षेत्रों में भारी बारिश तथा बैराज और जलाशयों से पानी छोड़े जाने के बाद पटना प्रशासन को तटबंधों पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।कमजोर तटबंधों के आसपास रेत की बोरियां, नायलॉन क्रेट, ट्रैक्टर और जनरेटर जैसी आवश्यक सामग्री तैयार रखने को कहा गया है। अधिकारियों और कर्मचारियों की चौबीसों घंटे तैनाती की व्यवस्था भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए राहत शिविरों में जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था करने पर भी जोर दिया जा रहा है। इनमें पीने का पानी, भोजन, शौचालय, रोशनी और दवाइयां शामिल हैं।इसके अलावा चिकित्सा शिविरों में सामान्य दवाइयों के साथ सांप और कुत्ते के काटने की दवाएं उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं। आपात स्थिति में सूचना और समन्वय के लिए जिला स्तर पर 24 घंटे संचालित नियंत्रण कक्ष की व्यवस्था भी की गई है।
यह सवाल फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा में है। नेपाल जैसी आपदा भारत में भी आएगी, ऐसा निश्चित रूप से कहना सही नहीं होगा। भारत में बाढ़ का खतरा क्षेत्र विशेष की बारिश, नदियों के जलस्तर, बांधों और बैराजों से पानी छोड़े जाने तथा स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है।फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में पश्चिम बंगाल के कुछ निचले इलाकों में बाढ़ की आशंका और बिहार में संभावित बाढ़ को लेकर प्रशासनिक सतर्कता की बात सामने आई है। इसलिए इसे पूरे देश के लिए एक समान बाढ़ की चेतावनी के रूप में देखना उचित नहीं होगा।
बारिश और बाढ़ की आशंका वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करना चाहिए। जलभराव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से जाने से बचना जरूरी है।लोगों को खास तौर पर: नदी और नालों के किनारे जाने से बचना चाहिए। जलभराव वाली सड़कों पर वाहन चलाते समय सावधानी बरतनी चाहिए। बिजली के खंभों और खुले तारों से दूरी बनाए रखनी चाहिए। प्रशासन द्वारा जारी चेतावनियों और स्थानीय मौसम अपडेट पर नजर रखनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थान या राहत शिविर में जाने के लिए तैयार रहना चाहिए। सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली अपुष्ट खबरों के बजाय आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करना चाहिए।
अगले कुछ दिनों में बारिश की स्थिति इस पूरे घटनाक्रम के लिए महत्वपूर्ण होगी। यदि जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार भारी बारिश जारी रहती है, तो नदियों और जलाशयों में पानी की मात्रा और बढ़ सकती है। ऐसे में निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए चुनौती बढ़ सकती है।दूसरी ओर, यदि बारिश में कमी आती है और जलस्तर नियंत्रित रहता है, तो बाढ़ का खतरा भी कम हो सकता है। इसलिए फिलहाल स्थिति पर लगातार निगरानी रखना सबसे महत्वपूर्ण है।
नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद भारत के कुछ राज्यों में भी बाढ़ को लेकर सतर्कता बढ़ गई है। पश्चिम बंगाल में दामोदर घाटी क्षेत्र को लेकर ऑरेंज अलर्ट की स्थिति है और पूर्व बर्दवान, हुगली तथा हावड़ा जैसे निचले इलाकों में संभावित खतरे को देखते हुए निगरानी बढ़ाई गई है। वहीं बिहार में भी प्रशासन ने संभावित बाढ़ से निपटने के लिए तटबंधों और राहत व्यवस्थाओं को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं।फिलहाल सबसे जरूरी बात यह है कि घबराने के बजाय सतर्क रहें और आधिकारिक निर्देशों का पालन करें। मौसम और जलस्तर में होने वाले बदलाव के आधार पर प्रशासन आगे नए निर्देश जारी कर सकता है।